Thursday, October 15, 2026
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भाषाओं पर मचा है बवाल, समझिए कितने लोग बोलते हैं हिंदी

पिछले कुछ दिनों से हिंदी भाषा को लेकर बवाल मचा हुआ है। इसकी शुरुआत तब हुई जब गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों से अपील की कि इंग्लिश के बजाए हिंदी में एक-दूसरे के साथ संवाद किया जानिए। हालंकि उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं का विकल्प नहीं होना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि देश में हिंदी का क्या गणित है?

भारत में कितने लोग हिंदी बोलते हैं?

2011 की भाषाई जनगणना में 121 मातृभाषाएं हैं। इन 121 भाषाओं में से संविधान की 8वीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल हैं। इन 22 भाषाओं में से हिंदी सबसे अधिक बोली जानी वाली भाषा है। 52.8 करोड़ लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो कि 43.63 फीसद आबादी थी। इसका मतलब यह है कि 56.4 फीसद लोगों की मातृभाषा हिंदी नहीं थी। हालांकि देश के करीब 57 फीसद लोग हिंदी भाषा को समझते हैं।

हिंदी के बाद बंगाली (8.03%), मराठी (6.86%), तेलुगु (6.7%), तमिल (5.7%), गुजराती (4.58%), उर्दू (4.19%), कन्नड़ (3.61%), ओडिया (3.1%), मलयालम (2.88%), पंजाबी (2.74%), असमिया (1.26%) और मैथिली (1.12%) जैसी संविधान की सूची में शामिल बड़ी भाषाएं हैं।

हिंदी दशकों से भारत की प्रमुख भाषाओं में से रही है। 1971 की जनगणना में 37 फीसद लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो 1981 में बढ़कर 38.7 फीसद, 1991 में 39.2 फीसद, 2001 में 41 फीसद और 2011 में 43.6 फीसद तक पहुंच गई।

हिंदी की हिस्सेदारी बढ़ी तो बंगाली, मलयालम और उर्दू जैसी भाषाओं में गिरावट आई है। लेकिन अगर आप आबादी के लिहाज से देखें तो 1971 में 20.2 करोड़ लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी बताई थी जो 2011 में 2.6 गुना बढ़कर 52.8 करोड़ तक पहुंच गई। इसके साथ ही पंजाबी, मैथिली, बंगाली, गुजराती और कन्नड़ जैसी भाषाओं को मातृभाषा बताने वाले लोगों की संख्या भी दोगुनी से अधिक हो गई।

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