दो दिन में पूरी हुई एलआईसी की शेयर बिक्री
नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला है। सरकार ने इस प्रक्रिया के तहत ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया, जिससे दो दिनों के भीतर शेयर बिक्री सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इस कदम के साथ एलआईसी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई, जो नियामकीय तय समयसीमा से पहले ही हासिल कर ली गई। इस ओएफएस के जरिए 82 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित किए गए, जिससे सरकार को करीब 31,552 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
क्या होता है ओएफएस?
ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं। एलआईसी के मामले में यह बिक्री भारत सरकार द्वारा की गई है। इसमें कंपनी ने कोई नए शेयर जारी नहीं किए हैं, इसलिए इस सौदे से मिलने वाली पूरी राशि सरकार के खाते में जाएगी, जबकि एलआईसी की शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं होगा।
सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने का उद्देश्य
इससे पहले एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत थी और आम निवेशकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत शेयर थे। ओएफएस के जरिए सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया था, जिसे कंपनी ने तय समय से पहले ही पूरा कर लिया।
शेयर कीमतों पर क्यों पड़ा असर?
सरकार ने ओएफएस के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया, जो घोषणा से पहले एलआईसी के बंद भाव 428.50 रुपये से लगभग 10.9 प्रतिशत कम था। कम कीमत पर शेयर उपलब्ध होने की वजह से निवेशकों का रुझान ओएफएस की ओर बढ़ा और खुले बाजार में खरीदारी धीमी पड़ गई। इसके अलावा, बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर भी अल्पकालिक दबाव देखने को मिला।
वित्तीय प्रदर्शन रहा मजबूत
एलआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी के नए व्यवसाय का मूल्य (वीएनबी) 41.6 प्रतिशत बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि वीएनबी मार्जिन 17.6 प्रतिशत से बढ़कर 21.2 प्रतिशत हो गया। वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ 19.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,419 करोड़ रुपये रहा, जो उसके मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत है।



