Saturday, May 16, 2026
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सोने-चांदी पर आयात शुल्क 15% हुआ

भारत सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने और लगातार गिरते रुपये को स्थिरता प्रदान करने के लिए एक अत्यंत कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सोने और चांदी पर बुनियादी सीमा शुल्क (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया है। एक ही झटके में की गई 9 प्रतिशत अंकों की यह वृद्धि दशकों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है।

यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील के कुछ ही समय बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से “सोना खरीदना कम करने” का आग्रह किया था ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। हालांकि, इस नीतिगत बदलाव ने सर्राफा बाजार में हड़कंप मचा दिया है और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे सोने की तस्करी और ‘ग्रे मार्केट’ को बढ़ावा मिल सकता है।

आर्थिक विवशता: कमजोर रुपया और वैश्विक संकट

सरकार का यह निर्णय ऐसी स्थिति में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था कई बाहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल ही में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.43 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था, जिससे आयात बिल काफी महंगा हो गया है।

आयात शुल्क बढ़ाने के प्रमुख कारण:

  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव: भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना आयातक है। हर साल देश लगभग 800 से 900 टन सोना आयात करता है, जिसके लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) खर्च करनी पड़ती है। रुपये की कमजोरी के बीच, इस “सोना आयात बिल” को कम करना भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय की प्राथमिकता बन गया है।

  • मध्य-पूर्व का संकट: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकेबंदी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में सरकार जरूरी ईंधन और ऊर्जा आयात के लिए एक-एक डॉलर बचाने की कोशिश कर रही है।

  • अपील से नीति तक का सफर: प्रधानमंत्री की भावनात्मक अपील को अब एक सख्त वित्तीय नीति में बदल दिया गया है। सोने को महंगा करके सरकार का उद्देश्य घरेलू बचत को सोने जैसे “डेड एसेट” (निष्क्रिय संपत्ति) से हटाकर उत्पादक वित्तीय साधनों की ओर मोड़ना है।

आम आदमी पर असर: शादियों के सीजन में बड़ा झटका

24 कैरेट सोना पहले से ही ₹1,52,000 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। अब 9% अतिरिक्त ड्यूटी के बाद, इसकी कीमतें ₹1,60,000 से ₹1,65,000 के पार जाने की उम्मीद है। यह उन परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है जो मई-जून के पीक वेडिंग सीजन में खरीदारी की योजना बना रहे थे।

विवरण पहले (6% ड्यूटी) अब (15% ड्यूटी)
आयात शुल्क दर 6% 15%
₹1 लाख के सोने पर टैक्स ₹6,000 ₹15,000
बाजार पर प्रभाव सामान्य भारी उछाल

एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए, अब गहनों की लागत केवल टैक्स के कारण लगभग ₹13,000 से ₹14,000 प्रति 10 ग्राम बढ़ जाएगी। जौहरियों का कहना है कि पुराने बुक किए गए ऑर्डर पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि नया स्टॉक अब महंगी दरों पर आएगा।

उद्योग की चेतावनी: तस्करी का साया

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) और अन्य व्यापारिक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब टैक्स का अंतर इतना अधिक हो जाता है, तो तस्करी करने वालों के लिए मुनाफा बहुत बढ़ जाता है।

“जब अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच इतना बड़ा अंतर होता है—खासकर जब केवल टैक्स ही ₹14,000 प्रति 10 ग्राम के करीब हो—तो तस्करी को रोकना लगभग असंभव हो जाता है। हम अनजाने में बाजार को अनधिकृत चैनलों के हाथों में सौंप रहे हैं,” एक प्रमुख ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता ने कहा।

इतिहास इस बात का गवाह है कि 2013 में जब ड्यूटी 10% की गई थी, तब भारत में सोने की तस्करी में 65% की वृद्धि देखी गई थी। अब अधिकारियों को हवाई अड्डों, समुद्री रास्तों और नेपाल व श्रीलंका की सीमाओं के माध्यम से अवैध सोने के आने का डर सता रहा है।

ग्रे मार्केट के तीन बड़े खतरे

  1. हवाला नेटवर्क की सक्रियता: उच्च ड्यूटी के कारण लोग आधिकारिक बैंकिंग चैनलों को छोड़कर ‘हवाला’ का रास्ता अपना सकते हैं। इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व का नुकसान होगा।

  2. उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी: ग्रे मार्केट में बिकने वाले सोने की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती। सस्ता सोना खरीदने के चक्कर में आम ग्राहक ठगी का शिकार हो सकते हैं।

  3. हॉलमार्किंग योजना को झटका: सरकार की अनिवार्य BIS हॉलमार्किंग योजना, जो शुद्धता सुनिश्चित करती है, को बड़ा नुकसान हो सकता है। तस्करी का सोना बिना हॉलमार्क के बिकता है, जिससे पूरी उद्योग प्रणाली की पारदर्शिता खतरे में पड़ जाएगी।

चांदी और औद्योगिक क्षेत्र पर प्रभाव

15% आयात शुल्क केवल सोने तक सीमित नहीं है, यह चांदी पर भी लागू होगा। चांदी का उपयोग न केवल गहनों में, बल्कि सोलर पैनल, ईवी (EV) बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन मिशन की लागत बढ़ जाएगी। सोलर सेल के निर्माण में चांदी एक महत्वपूर्ण घटक है, और इसकी लागत बढ़ने से भारतीय सोलर पैनल अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे हो सकते हैं।

क्या यह सही कदम है?

अर्थशास्त्री इस कदम को “आर्थिक फायरफाइटिंग” (आपातकालीन बचाव) के रूप में देख रहे हैं। व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से, रुपये की रक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत करना अनिवार्य है। हालांकि, ज्वैलरी उद्योग का तर्क है कि इस वृद्धि को चरणों में किया जाना चाहिए था ताकि बाजार को संभलने का मौका मिलता।

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या भारतीय उपभोक्ता सोने के प्रति अपने गहरे प्रेम को कम करेंगे, या बाजार का एक बड़ा हिस्सा आधिकारिक रास्तों को छोड़कर अंधेरी गलियों (ग्रे मार्केट) की ओर मुड़ जाएगा।

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