Friday, August 28, 2026
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वैश्विक उथल-पुथल के बीच सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा

भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव के “परफेक्ट स्टॉर्म” (दोहरी मार) के बीच, वित्तीय वर्ष 2026 के अंतिम कारोबारी सत्र यानी सोमवार, 30 मार्च को भारतीय शेयर बाजारों ने “ब्लैक मंडे” का मंजर देखा। भारी बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 1,200 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 मुश्किल से 22,450 के स्तर को बचाने के लिए संघर्ष करता दिखा। यह गिरावट पश्चिम एशिया में फैलते संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की रिकॉर्ड निकासी के कारण आई है।

सुबह 11:12 बजे तक की स्थिति:

  • BSE सेंसेक्स: 72,363.62 पर (1,219.60 अंक या 1.66% की गिरावट)।

  • NSE निफ्टी 50: 22,456.85 पर (362.75 अंक या 1.59% की गिरावट)।

  • बाजार का रुख: पूरी तरह नकारात्मक रहा, जहाँ 3,000 से अधिक शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि केवल 900 से कम शेयरों में बढ़त रही।

कच्चे तेल का झटका और भू-राजनीतिक तनाव

गिरावट का मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 3% का उछाल है, जो सोमवार को $115.98 प्रति बैरल पर पहुँच गया। इसके साथ ही एक महीने में तेल की कीमतों में 60% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है—यह अस्थिरता 1990 में कुवैत पर इराक के आक्रमण के दौरान देखी गई उथल-पुथल से भी अधिक है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ठप होने का डर पैदा हो गया है।

‘जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज’ के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा: “युद्ध से पहले भारत जिस ‘गोल्डीलॉक्स’ परिदृश्य (उच्च विकास और कम मुद्रास्फीति) का आनंद ले रहा था, वह अब लगभग गायब हो गया है। हम अब कम जीडीपी विकास और उच्च राजकोषीय घाटे के चरण में प्रवेश कर रहे हैं।”

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी

मार्च 2026 भारतीय बाजारों के लिए मार्च 2020 (कोविड-19 क्रैश) के बाद का सबसे खराब महीना साबित हुआ है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इस महीने रिकॉर्ड ₹1.18 लाख करोड़ (लगभग $12.3 बिलियन) की निकासी की है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाले प्रेषण (remittances) में गिरावट और रुपये के लगातार अवमूल्यन ने वैश्विक निवेशकों को आक्रामक विक्रेता बना दिया है।

बैंकिंग शेयरों पर आरबीआई (RBI) के निर्देशों की मार

निफ्टी में भारी वजन रखने वाला बैंकिंग क्षेत्र 2.5% टूट गया। यह गिरावट आरबीआई द्वारा बैंकों की शुद्ध खुली रुपया स्थिति (Net Open Rupee Position) को $100 मिलियन पर सीमित करने के फैसले के बाद आई है। ‘जेफरीज’ (Jefferies) के विश्लेषकों का सुझाव है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान अप्रैल तक जारी रहता है, तो विमानन (Aviation), पेंट और सीमेंट जैसे क्षेत्रों की कमाई में 10% से अधिक की गिरावट आ सकती है।

तकनीकी दृष्टिकोण और बाजार की स्थिति

बाजार में अस्थिरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडिया विक्स (India VIX) 8% उछलकर 28.78 के स्तर पर पहुँच गया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी को सुधार का संकेत देने के लिए 24,000 के स्तर के ऊपर टिकना होगा। 31 मार्च को छुट्टी के कारण बाजार बंद रहेंगे, जिससे वित्तीय वर्ष 2026 का अंत काफी निराशाजनक रहा, जिसमें कुल मिलाकर बाजार ने अपने मूल्य का 6% हिस्सा खो दिया है।

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