Tuesday, May 26, 2026
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Homeउत्तराखंडमामले को लेकर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई

मामले को लेकर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को हुई सुनवाई

नैनीताल,। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में हुई करोड़ों रुपए की अनियमितताओं के खिलाफ दायर याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा है क्रिकेट एसोसिएशन को याचिका की कॉपी दें। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने आगामी सोमवार 25 अगस्त की तिथि नियत की है। दरअसल, देहरादून निवासी बुद्धि चंद रमोला ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड में क्रिकेट कराने के लिए धन का दुरुपयोग किया गया है, जो सुविधा खिलाड़ी को मिलनी चाहिए थी, वो उसे नहीं मिली। एसोसिएशन ने खिलाड़ियों के पेट केलों से भर दिया। केलों का जो बिल दिखाया गया, वो भी लाखों का था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि एसोसिएशन ने उनके खाने के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला किया है। जबकि उस हिसाब से खेल हुए ही नहीं। इसलिए इसकी जांच कराई जाए। अभी तक करोड़ों रुपए का दुरुपयोग एसोसिएशन की ओर से किया गया है। उसकी ऑडिट रिपोर्ट भी आ चुकी है।
याचिका में ये भी कहा गया कि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को साल 2015 में बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से मान्यता मिल गई थी। बीसीसीआई तब से एसोसिएशन को फंड देता आ रहा है। साल 2022 में ही 10 करोड़ का बजट खेल कराने के लिए दिया, उसका भी कोई हिसाब किताब नहीं है। न ही बैलेंस शीट को सार्वजनिक किया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब इसकी शिकायत उपाध्यक्ष से की गई तो उनकी ओर से सदस्यों को नोटिस भी दिया गया, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि, एसोसिएशन में 5 सदस्यों का चुनाव होता है और 4 सदस्य नामित किए जाते हैं। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि इसकी जांच कराई जाए।
याचिका में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड, आर्यन गोयल, अमित केरे, सिद्धार्थ रावत, योगेंद्र बाजपेयी, राहुल पंवार, शोभित श्रीवास्तव, प्रदीप, दीपिका महरा, धीरज खरे, वीएस पांडे, मनीष डोभाल, अनिल, प्रभु स्वरूप और शिव बहादुर जोशी को पक्षकार बनाया गया है। उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के नाम से जाना जाता है। जो उत्तराखंड में क्रिकेट की गतिविधियों को संचालित करने वाली आधिकारिक संस्था है। यह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से संबद्ध है और राज्य में क्रिकेट के विकास, आयोजन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उत्तराखंड क्रिकेट बोर्ड की स्थापना साल 2000 में हुई थी, जब उत्तराखंड एक अलग राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश से अलग हुआ। शुरुआत में यह उत्तराखंड क्रिकेट के लिए एक स्वतंत्र संगठन के रूप में काम करता था। बाद में इसे बीसीसीआई से पूर्ण मान्यता मिली। इसका मकसद राज्य में क्रिकेट को बढ़ावा देना, खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और अवसर प्रदान करना और राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करना है। उत्तराखंड की पुरुष और महिला क्रिकेट टीमें बीसीसीआई की ओर से आयोजित रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेती हैं। एसोसिएशन स्थानीय स्तर पर जिला और राज्य स्तरीय टूर्नामेंट भी आयोजित करता है। ताकि, युवा खिलाड़ियों को अवसर मिले। एसोसिएशन ने देहरादून और हल्द्वानी जैसे शहरों में क्रिकेट स्टेडियम एवं प्रशिक्षण सुविधाओं का विकास किया है। देहरादून का राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम उत्तराखंड का प्रमुख क्रिकेट स्टेडियम है, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच आयोजित होते हैं। हल्द्वानी में भी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम है, जो स्थानीय और राष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए उपयोग किया जाता है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड ने उत्तराखंड प्रीमियर लीग की शुरुआत की है, जो एक टी 20 लीग है। इसका उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और क्रिकेट को लोकप्रिय बनाना है। इस लीग में स्थानीय खिलाड़ियों के साथ कुछ राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी भाग लेते हैं।

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