हल्द्वानी, । जमरानी बांध में विस्थापित होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मुआवजे के साथ ही पुनर्वास योजना का भी फायदा मिलेगा। इसके लिए जमरानी बांध परियोजना इकाई ने ग्रामीणों के पुनर्वास का प्लान तैयार कर लिया है। प्लान में आपत्तियों के निस्तारण सहित बांध प्रभावितों को घर बनाकर सौंपने की समय सीमा तय की गई है। राज्य की कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही बांध निर्माण के साथ ही पुनर्वास का काम भी शुरू हो जाएगा। जमरानी बांध निर्माण से पहले सरकार के लिए क्षेत्र के 226 परिवारों के करीब 700 ग्रामीणों का पुनर्वास किया जाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जमरानी बांध परियोजना इकाई ने ग्रामीणों के पुनर्वास व आपत्तियों के निस्तारण के लिए प्लान तैयार कर लिया है।
योजना के मुताबिक बांध निर्माण से पहले डूब क्षेत्र में रह रहे 223 परिवारों को 2023 तक मुआवजा दिए जाने की तिथि निर्धारित की है। इसके साथ ही बांध प्रभावितों को 2025 तक घर तैयार कर मुहैया कराए जाएंगे। इसके लिए सरकार भूमि अध्याप्ति के अधिनियमों के तहत डूब क्षेत्र के लोगों का पुनर्वास करेगी। इस दौरान बांध प्रभावितों को मुआवजा दिलाने के साथ ही बेहतर सुविधाओं के साथ तैयार घर दिए जाएंगे। साथ ही पुनर्वास स्थल को आवश्यक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। जमरानी बांध परियोजना में मुआवजे के बाद सभी 226 परिवारों को बेहतर सुविधाओं वाले क्षेत्र में घर तैयार कर दिए जाने हैं। इन सारे कामों में 600 करोड़ से अधिक रुपये खर्च होने हैं। जमरानी बांध परियोजना इकाई के प्लान के मुताबिक राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही 2023 से बांध निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 2028 तक पांच साल के भीतर बांध का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वर्ष 2018 की मंजूरी के मुताबिक 25028 करोड़ की लागत से बांध का निर्माण कार्य पूरा होना है। लेकिन यह बजट 2023 के मानकों के मुताबिक रिवाइज किया जाएगा। इसमें शहर की पेयजल योजना के बजट को अलग से शामिल किया जाएगा।


