कांग्रेस के पराभव और उसमें पार्टी हाईकमान की भूमिका पर जब भी ईमानदारी से चर्चा होगी तो उसमें राहुल गांधी और उनके कुत्ते पिडी का उल्लेख जरूर होगा। राहुल और उनके कुत्ते के अलावा इस घटना में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी शामिल थे। तब वे कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे और राच्य में पार्टी की खराब स्थिति पर चर्चा के लिए राहुल से दिल्ली में उनके तुगलक रोड के आवास पर मिलने गए
इस मुलाकात में राहुल अपने कुत्ते से खेलते रहे और जब हिमंत और सीपी जोशी में किसी बात पर तेज बहस हो गई तो कांग्रेस के प्रथम परिवार के उत्तराधिकारी यह कहते हुए उठ कर चल दिए कि आप जो करना चाहते हैं करें, मुझे इससे कोई मतलब नहीं है। उसके बाद हिमंत भाजपा में शामिल हुए और फिर जो हुआ, वह इतिहास का हिस्सा बन चुका है। भाजपा ने न सिर्फ असम बल्कि उत्तर पूर्व के राच्यों में अपनी सत्ता स्थापित की और इसके शिल्पकार बने हिमंत। इन्हीं हिमंत के बहुमुखी व्यक्तित्व और बहुआयामी कृतित्व को राजनीतिक विश्लेषक अजित दत्ता ने अपनी पुस्तक ‘हिमंत बिस्वा सरमा : फ्राम ब्याय वंडर टु सीएम’ का विषय बनाया है।
कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। हिमंत इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। 1980 में असम आंदोलन के चरम पर अटल बिहारी वाजपेयी जनसभा को संबोधित करने गुवाहाटी पहुंचे थे। मंच पर आसीन कई नेता जब संबोधन खत्म कर चुके तो 10-11 साल के एक बालक को वहां लाया गया। उसके मंचासीन होते ही उपस्थित जनसमूह से ऐसा शोर उठा, जैसे सबको उसकी ही प्रतीक्षा थी। वह बोलता गया और जनता की दीवानगी बढ़ती गई। अटल जी ने पास बैठे असम के एक बड़े नेता से पूछा कि यह कौन है? जवाब आया, हिमंत बिस्वा सरमा। इस पर अटल जी ने कहा कि यह बालक बहुत दूर तक जाएगा। यह कोई पहला मौका नहीं था, जब हिमंता के बारे में यह कहा गया था, लेकिन किसे पता था कि अटल जी जिस बालक के बारे में भविष्यवाणी कर रहे हैं, वह उनकी ही पार्टी के जरिए अपने राजनीतिक जीवन के शीर्ष पर पहुंचेगा।



