Saturday, October 31, 2026
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उत्तराखंड में राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया वर्ष 2030 तक ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ के निर्माण का सामूहिक संकल्प

ऋषिकेश: राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में  अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के मुख्य सभागार में ‘शक्ति समागम: सृजन से समृद्धि’ संवाद कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की महिला लाभार्थियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लखपति दीदियों ने भारी संख्या में भाग लिया।

समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह आज सिर्फ बचत का जरिया नहीं, बल्कि महिला आत्मविश्वास, वित्तीय स्वावलंबन और सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के चेहरों पर संघर्ष से सफलता तक की दास्तान साफ दिखाई देती है। उन्होंने यह रेखांकित किया कि उत्तराखंड में लगभग 22,000 समूहों से जुड़ी 2.5 लाख से अधिक महिलाओं ने ₹300 करोड़ से अधिक के बैंक ऋण का उपयोग कर जो वित्तीय अनुशासन दिखाया है, वह संपूर्ण देश के लिए प्रेरणादायी है।
अध्यक्ष श्रीमती रहाटकर ने देश को वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाने के सामूहिक संकल्प का आह्वान किया तथा सभागार में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की शपथ दिलाई। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को केवल ‘सेविंग ग्रुप’ तक सीमित न रखकर अधिकारों, साइबर सुरक्षा, पॉश व घरेलू हिंसा कानून और पोषण से जुड़े ‘नॉलेज ग्रुप’ के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने आयोग द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण एवं सुरक्षा हेतु चलाए जा रहे अभियानों की चर्चा करते हुए कहा कि पर्वतीय राज्य की महिलाएँ अत्यंत जुझारू और कर्मठ हैं। उन्होंने राज्य में महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने के प्रयासों की सराहना की।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने उत्तराखंड के निर्माण व विकास में नारी शक्ति की ऐतिहासिक भूमिका का स्मरण कराया और राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को दिए गए 30% क्षैतिज आरक्षण व लखपति दीदी योजना के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डाला।

नगर निगम ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान तथा एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह ने भी अपने विचार साझा करते हुए महिला स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और संस्थागत सहयोग की निरंतरता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं ने स्वरोजगार, बालिका शिक्षा और समाज के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का प्रण लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के उप निदेशक रामावतार सिंह, राज्यमंत्री चारु कोठारी, प्रदेश अध्यक्ष महिला मोर्चा रुचि भट्ट, तुलसी मेहरा, रेखा रयाल, उर्वशी चौहान, कृतिका दबई, गुनिता, सहित मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन के साथ समागम का समापन हुआ।

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