Sunday, August 16, 2026
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स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य सचिव ने सुशासन, विकसित उत्तराखण्ड और हिमालय संरक्षण का लिया संकल्प

देहरादून : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, उत्तराखण्ड पुलिस एवं पीएसी के जवानों, राजकीय इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिनके संघर्ष से आज भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है।

उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सामरिक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं, युवा विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने शासन एवं नागरिक सेवाओं के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। अब हमारा लक्ष्य ऐसा समावेशी, सतत और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

25 वर्ष के उत्तराखण्ड में उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। राज्य का गठन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों और विकास की आकांक्षाओं का लंबा संघर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।

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