Thursday, March 19, 2026
spot_imgspot_img
Homeउत्तराखंडस्नेक वेनम मामला- सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर...

स्नेक वेनम मामला- सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर की रद्द

साक्ष्य के अभाव में सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव को दी राहत

नई दिल्ली। चर्चित स्नेक वेनम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह मामला वर्ष 2023 में नोएडा में आयोजित एक कथित रेव पार्टी से जुड़ा था, जिसमें सांपों के जहर के इस्तेमाल के आरोप लगे थे और जिसने देशभर में काफी चर्चा बटोरी थी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कई अहम कानूनी बिंदुओं पर विचार किया। अदालत ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत जिस साइकोट्रॉपिक पदार्थ का उल्लेख किया गया है, वह इस कानून की निर्धारित सूची में शामिल ही नहीं है। ऐसे में इस अधिनियम के तहत दर्ज मामला टिकाऊ नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एल्विश यादव के पास से कोई प्रत्यक्ष बरामदगी नहीं हुई थी। चार्जशीट में केवल यह आरोप था कि उन्होंने किसी सहयोगी के माध्यम से सामग्री मंगवाई थी, जो अपने आप में पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।

इसके अलावा, अदालत ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 55 का हवाला देते हुए कहा कि इस कानून के तहत अभियोजन केवल अधिकृत अधिकारी की शिकायत के आधार पर ही शुरू किया जा सकता है। मौजूदा एफआईआर इस प्रक्रिया के अनुरूप नहीं पाई गई, इसलिए इसे विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए आरोप स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होते, क्योंकि वे एक पूर्व शिकायत से जुड़े थे, जिसे पहले ही बंद किया जा चुका है।

इन सभी आधारों पर सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि एफआईआर न्यायिक जांच की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, इसलिए इसे रद्द किया जाना उचित है। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उसने मामले के तथ्यों या आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

साथ ही, कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को यह स्वतंत्रता भी दी है कि वह कानून के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए नई शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मुद्दे पर चिंता भी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग इस तरह के मामलों में शामिल पाए जाते हैं, तो इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है, खासकर जब बात बेजुबान जानवरों के उपयोग की हो।

बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि एल्विश यादव एक वीडियो शूट के सिलसिले में गायक फाजिलपुरिया के निमंत्रण पर कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनका दावा था कि न तो रेव पार्टी के पुख्ता सबूत हैं और न ही किसी मादक पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। साथ ही, लैब रिपोर्ट के आधार पर यह भी कहा गया कि बरामद सांप विषैले नहीं थे।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से दावा किया गया कि मौके से नौ सांप, जिनमें कोबरा भी शामिल थे, बरामद किए गए थे और सांप के जहर के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। अदालत ने इस पर भी सवाल उठाए कि जहर निकालने और उसके उपयोग की प्रक्रिया क्या रही होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here


Most Popular

Recent Comments