Friday, January 30, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नैतिक उपयोग अनिवार्य: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में काम करने वाले प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) और विशेषज्ञों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि एआई के ‘नैतिक उपयोग’ (Ethical Use) पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का एआई पारिस्थितिकी तंत्र पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित होना चाहिए।

यह बैठक फरवरी में आयोजित होने वाले ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की पूर्व-तैयारी के रूप में आयोजित की गई थी। इसमें विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक, ज़ोहो कॉर्पोरेशन, रिलायंस जियो और अडानीकॉनेक्स जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों के साथ-साथ आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।

डेटा सुरक्षा और लोकतंत्र की ताकत

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एआई यात्रा राष्ट्र के चरित्र और मूल्यों को प्रतिबिंबित करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जिस तरह यूपीआई (UPI) के माध्यम से भारत ने अपनी तकनीकी शक्ति का लोहा मनवाया है, उसी तरह एआई के क्षेत्र में भी हमें दुनिया को प्रेरित करना चाहिए।” उन्होंने एआई के लोकतंत्रीकरण और डेटा सुरक्षा को सर्वोपरि बताया।

‘एआई फॉर ऑल’ और स्वदेशी तकनीक

प्रधानमंत्री ने ‘एआई फॉर ऑल’ (सबके लिए एआई) के विजन को दोहराते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि वे स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक का उपयोग करें।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस चर्चा में भाग लिया। बैठक के दौरान, सीईओ ने भारत को एआई तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के सरकारी प्रयासों की सराहना की और वैश्विक स्तर पर भारत को अग्रणी बनाने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

निष्कर्ष: वैश्विक केंद्र बनता भारत

भारत का इंडिया-एआई मिशन 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2026 तक, भारत ने 38,000 से अधिक जीपीयू (GPUs) की क्षमता हासिल कर ली है, जो स्टार्टअप्स को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भरोसा करती है क्योंकि यह पैमाना (Scale), विविधता (Diversity) और लोकतंत्र (Democracy) के अनूठे मेल पर आधारित है।

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