मुंबई — एक ऐसे अभिनेता के लिए जिसका करियर विद्रोह और “सीरियल किसर” की छवि की नींव पर बना था, असल जिंदगी ने एक ऐसी चुनौती पेश की जिसकी बराबरी कोई फिल्मी स्क्रिप्ट नहीं कर सकती। हाल ही में एक भावुक बातचीत में, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया, इमरान हाशमी ने अपने जीवन के सबसे दुखद अध्याय को याद किया—वह दिन जब उनके चार साल के बेटे, अयान को कैंसर होने का पता चला था। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान साझा किया गया यह खुलासा, एक ऐसे पिता की लाचारी और संवेदनशीलता को दर्शाता है जिसकी दुनिया महज बारह घंटों में पलट गई थी, जिसने एक बॉलीवुड स्टार को एक अथक देखभाल करने वाले (caregiver) पिता में बदल दिया।
वह दोपहर जिसने सब कुछ बदल दिया
वह तारीख हाशमी की यादों में आज भी अंकित है: 13 जनवरी, 2014। यह एक सामान्य रविवार की तरह शुरू हुआ था। परिवार बाहर ब्रंच के लिए गया था, पिज्जा और हंसी-मजाक का आनंद ले रहा था, इस बात से बेखबर कि जीवन को बदल देने वाला एक तूफान दस्तक दे रहा है।
हाशमी ने याद करते हुए कहा, “मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर वह था जब मेरा बेटा 2014 में बीमार पड़ा। मैं उन शब्दों को व्यक्त भी नहीं कर सकता कि वह दौर क्या था। वह 5 साल तक चला। मेरी जिंदगी एक दोपहर में बदल गई… उसके मूत्र में खून आया। अगले तीन घंटों में, हम एक डॉक्टर के क्लिनिक में थे। डॉक्टर ने कहा कि आपके बेटे को कैंसर है। आपको अगले ही दिन उसका ऑपरेशन कराना होगा।”
कुछ ही घंटों के भीतर, ध्यान फिल्म सेट और बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से हटकर विल्म्स ट्यूमर (Wilms’ Tumor) पर केंद्रित हो गया, जो गुर्दे के कैंसर का एक दुर्लभ रूप है। अचानक मिली इस खबर ने परिवार को सुन्न कर दिया। इसके कोई चेतावनी संकेत नहीं थे—न बुखार, न कोई शारीरिक परेशानी। माता-पिता को बाद में एहसास हुआ कि अयान के बाईं ओर एक छोटा सा उभार (bump), जिसे उन्होंने बचपन का सामान्य वजन बढ़ना समझकर नजरअंदाज कर दिया था, वास्तव में एक घातक गाँठ थी।
पछतावा और संघर्ष: 5 साल की यात्रा
इमरान और उनकी पत्नी, परवीन शाहानी के लिए, शुरुआती झटके के बाद भारी अपराधबोध (guilt) की भावना पैदा हुई। हाशमी ने पहले के साक्षात्कारों में साझा किया था, “हमें लगा कि वह ट्यूमर उसका वजन बढ़ना है। पहली चीज़ जो हमने महसूस की वह अपराधबोध था। हमसे कहाँ गलती हुई?”
यह लड़ाई पांच कठिन वर्षों तक चली। यह दौर कई सर्जरी और गहन कीमोथेरेपी का था। जहाँ हाशमी ने इलाज के समर्थन के लिए काम करना जारी रखा, वहीं उनका दिल अस्पताल के गलियारों में ही रहता था। उनके पेशेवर “हाई पॉइंट” का सामना अचानक किस्मत के एक ऐसे प्रहार से हुआ जिसे वे “चेहरे पर एक लात” की तरह वर्णित करते हैं।
“ठीक होना केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है—यह भावनात्मक, सामाजिक और विकासात्मक भी है। बच्चों को अपना आत्मविश्वास वापस पाने के लिए एक पोषणकारी वातावरण की आवश्यकता होती है। परिवारों को अपना जीवन फिर से संवारने के लिए निरंतर समर्थन की भी आवश्यकता होती है,” प्रमुख सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. संदीप नायक कहते हैं, जो उस सपोर्ट सिस्टम के महत्व पर जोर देते हैं जो हाशमी ने अपने बेटे के लिए बनाया था।
‘द किस ऑफ लाइफ’ की विरासत
2016 में, हाशमी ने अपने इस सदमे को एक शक्तिशाली माध्यम: साहित्य में बदल दिया। उन्होंने बिलाल सिद्दीकी के साथ मिलकर “द किस ऑफ लाइफ: हाउ अ सुपरहीरो एंड माई सन डिफीटेड कैंसर” किताब लिखी। यह पुस्तक एक दोहरे नैरेटिव के रूप में काम करती है—आधा उनके बॉलीवुड सफर का संस्मरण और आधा माता-पिता के लिए एक सर्वाइवल गाइड।
यह पुस्तक इस बात पर जोर देती है कि जहाँ दवा बीमारी का इलाज करती है, वहीं प्यार और धैर्य बच्चे का उपचार करते हैं। यह कई लोगों के लिए एक “आई-ओपनर” साबित हुई, जिसने चिकित्सा से जुड़ी जटिल शब्दावली को समझने योग्य सलाह में बदल दिया और शुरुआती जांच (early screening) की वकालत की। 2019 में, हाशमी ने आखिरकार वह खबर दी जिसका दुनिया इंतजार कर रही थी: अयान को आधिकारिक तौर पर कैंसर मुक्त घोषित कर दिया गया।
करियर में बदलाव: ‘सीरियल किसर’ से परिपक्व अभिनेता तक
इस कठिन समय ने हाशमी को न केवल एक व्यक्ति के रूप में, बल्कि एक कलाकार के रूप में भी बदल दिया। उनके शुरुआती वर्षों का “सुस्त और कमतर” अभिनय अब एक मंझे हुए और परिपक्व स्क्रीन प्रेजेंस में बदल गया। 2026 में, अभिनेता अपने करियर के एक महत्वपूर्ण पुनरुत्थान का गवाह बन रहे हैं।
नीरज पांडे द्वारा निर्देशित उनकी नवीनतम श्रृंखला, “तस्करी: द स्मगलर्स वेब”, में उनके द्वारा निभाए गए सुपरिटेंडेंट अर्जुन मीणा के किरदार के लिए काफी प्रशंसा मिली है। समीक्षकों ने उनके अभिनय में एक “नई गहराई” देखी है—एक शांत साहस जो शायद उनके वास्तविक जीवन की लड़ाइयों से उपजा है। इसके अतिरिक्त, आर्यन खान की सीरीज में उनके कैमियो ने एक ऐसे जागरूक अभिनेता को दिखाया जो अपनी पिछली छवि के साथ सहज है और अब अधिक जटिल पात्रों की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष: जागरूकता की एक आवाज
आज, अयान हाशमी एक स्वस्थ किशोर हैं, जो कभी-कभी अपने पिता की प्रसिद्धि से “शर्मिंदा” भी होते हैं, लेकिन वे विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की ताकत के एक जीवित प्रमाण हैं। इमरान हाशमी ‘चाइल्डहुड कैंसर अवेयरनेस मंथ’ (सितंबर) के लिए जागरूकता फैलाने के लिए लगातार अपने मंच का उपयोग करते हैं, और माता-पिता से लक्षणों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह करते हैं।
हाशमी परिवार की यह कहानी एक याद दिलाती है कि रूपहले पर्दे की चमक-धमक के पीछे ऐसे मानवीय संघर्ष छिपे होते हैं जो सार्वभौमिक हैं। यह एक ऐसे “सुपरहीरो” बेटे की कहानी है जिसने अपने प्रसिद्ध पिता को ताकत का सही मतलब सिखाया।



