मुंबई — भारत की दिग्गज इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने शुद्ध लाभ में मामूली गिरावट दर्ज की है। इसका मुख्य कारण नए लेबर कोड (श्रम संहिताओं) के प्रावधानों के तहत कर्मचारी लाभों के लिए एकमुश्त ₹1,191 करोड़ की राशि अलग रखना है। हालांकि, लाभ में इस गिरावट के बावजूद, कंपनी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है—इसका ऑर्डर बुक ₹7 लाख करोड़ के पार पहुँच गया है।
मुंबई स्थित इस कंपनी ने बताया कि तीसरी तिमाही में उसका समेकित शुद्ध लाभ 4% घटकर ₹3,215 करोड़ रहा। यदि ₹1,191 करोड़ का यह विशेष प्रावधान नहीं किया गया होता, तो कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की तुलना में अधिक होता। यह प्रावधान भारत के नए सामाजिक सुरक्षा और श्रम कोड के वित्तीय प्रभाव को देखते हुए किया गया है, जो कंपनियों को ग्रेच्युटी और अन्य लाभों की गणना के तरीके को बदलने के लिए मजबूर करते हैं।
वित्तीय प्रदर्शन: राजस्व बनाम प्रावधान
शुद्ध आय में गिरावट के बावजूद, कंपनी के परिचालन स्तर में वृद्धि जारी रही। एलएंडटी ने समेकित राजस्व में 10% की वृद्धि दर्ज की, जो ₹71,450 करोड़ तक पहुँच गई। कंपनी ने इस वृद्धि का श्रेय अपने प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग (P&M) पोर्टफोलियो में “निरंतर निष्पादन” को दिया।
मुनाफे पर सबसे बड़ा दबाव ₹1,191 करोड़ का कर्मचारी लाभ प्रावधान था। नए लेबर कोड के तहत ‘मजदूरी’ (wages) की परिभाषा का विस्तार किया गया है, जिससे भविष्य में भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी के प्रति कंपनी की देनदारी बढ़ जाएगी। एक श्रम-प्रधान इंजीनियरिंग फर्म होने के नाते, एलएंडटी इन भविष्य की देनदारियों के लिए पहले से तैयारी करने वाली अग्रणी कंपनियों में से एक है।
₹7 लाख करोड़ का मील का पत्थर: वैश्विक विस्तार
घरेलू बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में धीमी गति के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एलएंडटी का दबदबा बढ़ा है। कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹7,33,161 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जो 2024 की इसी अवधि की तुलना में 30% की वृद्धि दर्शाता है। विशेष बात यह है कि कुल ऑर्डर बुक का लगभग 49% हिस्सा अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों का है, जिसमें मध्य पूर्व (Middle East) की प्रमुख भूमिका है।
एलएंडटी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एस.एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा: “इस तिमाही में तीसरी तिमाही का अब तक का सबसे अधिक ऑर्डर फ्लो देखा गया। पहली बार, प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग पोर्टफोलियो में तिमाही ऑर्डर फ्लो ₹1 लाख करोड़ के पार निकल गया है—यह हमारी क्षमताओं और हमारे बिजनेस मॉडल की मजबूती का प्रतिबिंब है।”
क्षेत्रवार विश्लेषण: ऊर्जा और बुनियादी ढांचा
कंपनी की वृद्धि मुख्य रूप से दो क्षेत्रों द्वारा संचालित थी:
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बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (Infrastructure): इस क्षेत्र में ₹61,876 करोड़ के ऑर्डर मिले, जो 26% की वृद्धि है। कुल ऑर्डर में अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स की हिस्सेदारी 55% रही।
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ऊर्जा परियोजनाएं (Energy): ऊर्जा क्षेत्र में ₹46,049 करोड़ के ऑर्डर मिले, जो 19% अधिक है। इसमें हाइड्रोकार्बन-ऑफशोर विंड और कार्बनलाइट समाधानों में मिले बड़े ऑर्डर्स का योगदान रहा।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
एलएंडटी के नतीजे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। कंपनी का अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स पर बढ़ता ध्यान यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, लेबर कोड के प्रावधानों ने मुनाफे पर अस्थायी असर डाला है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दीर्घकालिक रूप से कंपनी के बैलेंस शीट को सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा।
आने वाली तिमाहियों में, बाजार की नजर इस बात पर होगी कि क्या घरेलू बुनियादी ढांचे के ऑर्डर्स में फिर से तेजी आती है, खासकर आगामी बजट और सरकारी खर्चों के परिप्रेक्ष्य में।



