Friday, September 18, 2026
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राज्य का आपदा प्रबन्धन उपनल एवं अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ा गया

देहरादून, । कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य के आपदा प्रबन्धन को पूरी तरह नाकाम बताते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां राज्य गठन के समय ही अलग से आपदा प्रबन्धन मंत्रालय का गठन किया गया था, किन्तु राज्य में आपदाओं से निपटने के लिए अब तक कोई प्रभावी तंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिसके कारण प्राकृतिक व मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। उन्होने कहा कि यह भी बडी विडंबना और आश्चर्य का विषय है कि राज्य का आपदा प्रबन्धन उपनल एवं अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ा गया है। डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कि अभी हाल ही में उत्तरकाशी के धराली एवं पौडी जनपद के अनेक स्थानों पर भीषण दैवीय आपदा का दंश लोगों को झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबन्धन विभाग का कार्य स्वयं मुख्यमंत्री देख रहे हैं जिनके पास अन्य कई महत्वपूर्ण विभाग हैं तथा राज्य में प्रत्येक वर्ष आने वाली भीषण आपदाओं को दृष्टिगत रखते हुए आपदा प्रबन्धन विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है जिसका दायित्व किसी अन्य मंत्री को दिया जाना चाहिए था ताकि आपदा के समय इस जिम्मेदारी का सही से निर्वहन किया जा सके।
डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कियूपीए सरकार के समय आपदा के लिए 100 प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार वहन करती थी जबकि वर्तमान में 90 प्रतिशत केन्द्र व 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में आपदा का बजट मात्र 1012 करोड है जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धराली आपदा के लिए 40 करोड़ रूपये के बजट का आवंटन किया गया है जबकि पौडी सहित अन्य जनपदों में भी लोगों को आपदा से जूझना पड़ा है, परन्तु अन्य आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया है राज्य सरकार की ओर से अन्य जिलों के लिए भी समुचित बजट आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धराली जैसी आपदा में मृतकों के परिजनों को केवल 4 लाख तथा घायलों को 2 लाख का प्रावधान किया गया है जिसे बढ़ाकर कम से कम 25 लाख एवं 10 लाख किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगभंग की हानि होने की स्थिति में मात्र 74000 रूपये तथा 40 से 60 प्रतिशत विकलांगता पर केवल 2.50 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है जबकि 60 प्रतिशत विकलांगता पर कम से कम 15 लाख रूपये का मुआबजा दिया जाय ताकि विकलांग व्यक्ति अपनी आजीविका चला सके। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा में घायलों का सम्पूर्ण उपचार राज्य सरकार की ओर से मुफ्त में किया जाना चाहिए।

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