राष्ट्र निर्माण और करियर एक-दूसरे के पूरक: मोहन भागवत का युवाओं को संदेश
कोच्चि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति की असली समृद्धि देश की समृद्धि और सुरक्षा से जुड़ी होती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
देश की प्रगति से जुड़ी है व्यक्तिगत सफलता
कोच्चि में आयोजित बालागोकुलम के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि व्यक्ति और राष्ट्र की उन्नति एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि जब देश मजबूत और सुरक्षित होता है, तभी परिवार और समाज भी समृद्ध होते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नागरिक राष्ट्र की उन्नति के लिए कार्य करते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके व्यक्तिगत जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए व्यक्तिगत लक्ष्य और राष्ट्रीय दायित्वों को साथ लेकर चलना आवश्यक है।
राष्ट्र निर्माण में हर व्यक्ति की भूमिका अहम
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समृद्धि और सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। देश की मजबूती ही नागरिकों के बेहतर भविष्य की नींव होती है।
उन्होंने लोगों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग का योगदान देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
युवाओं को दिया स्पष्ट संदेश
युवाओं को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि करियर और राष्ट्र सेवा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अक्सर युवा इस दुविधा में रहते हैं कि वे व्यक्तिगत सफलता को प्राथमिकता दें या देश के लिए काम करें, लेकिन दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सही दिशा और सोच के साथ व्यक्ति अपने करियर में आगे बढ़ते हुए देश के विकास में भी योगदान दे सकता है।
सम्मेलन में बच्चों से संवाद
कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने भगवान श्रीकृष्ण को पुष्पांजलि अर्पित की और बालागोकुलम से जुड़े बच्चों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के महत्व के बारे में प्रेरित किया।



