नई दिल्ली / मॉस्को — लगभग चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। क्रेमलिन ने गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का निमंत्रण दिया है। यह आमंत्रण ऐसे समय में आया है जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में त्रिपक्षीय वार्ता का अगला दौर रविवार को होने वाला है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पुष्टि की कि रूस ज़ेलेंस्की की सुरक्षा और कार्य के लिए आवश्यक शर्तों की गारंटी देने को तैयार है। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने पिछले साल इसी तरह के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि वे उस देश की राजधानी नहीं जा सकते जो हर दिन उनके शहरों पर मिसाइलें दाग रहा है।
अबू धाबी वार्ता: शांति की धुंधली उम्मीद
शांति प्रयासों में नई जान पिछले सप्ताह अबू धाबी में हुई पहली त्रिपक्षीय वार्ता से आई है। इसमें रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि उनके अनुरोध पर व्लादिमीर पुतिन कड़ाके की ठंड के कारण एक सप्ताह तक यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने के लिए सहमत हुए हैं।
यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने संकेत दिया है कि रूस के बातचीत के तरीके में “गुणात्मक बदलाव” आया है। रविवार, 1 फरवरी को होने वाले अगले दौर की वार्ता में 20 सूत्रीय शांति योजना पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय नियंत्रण सबसे पेचीदा मुद्दे हैं।
“मैंने व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति पुतिन से एक सप्ताह के लिए कीव और अन्य शहरों पर हमला न करने का अनुरोध किया था… और वे इसके लिए सहमत हो गए। यह एक बहुत अच्छी बात है,” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन में एक बैठक के दौरान कहा।
क्षेत्रीय विवाद: शांति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा
वार्ता में सबसे बड़ी बाधा डोनेट्स्क क्षेत्र का वह 20 प्रतिशत हिस्सा है जो अभी भी यूक्रेनी सेना के नियंत्रण में है। रूस चाहता है कि यूक्रेन वहां से पीछे हट जाए। दूसरी ओर, कीव का कहना है कि वह उस जमीन को “उपहार” में नहीं देगा जिसे रूस ने युद्ध के मैदान में नहीं जीता है।
इसके अलावा, यूरोप के सबसे बड़े ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भविष्य भी अधर में है। यूक्रेन इस क्षेत्र के विसैन्यीकरण (demilitarization) की मांग कर रहा है, जबकि रूस इसे अपने नियंत्रण में रखना चाहता है।
क्या मॉस्को जाएंगे ज़ेलेंस्की?
ज़ेलेंस्की ने हाल ही में कहा है कि वे क्षेत्रीय विवादों और परमाणु संयंत्र जैसे “सबसे संवेदनशील मुद्दों” पर पुतिन के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। हालांकि, क्या वे इसके लिए मॉस्को जाएंगे, यह अभी भी एक बड़ा सवाल है। रविवार की अबू धाबी वार्ता यह तय करने में निर्णायक होगी कि क्या यह युद्ध अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश करने से पहले समाप्त हो पाएगा या नहीं।



