आईपीएल (IPL) की तेज़-तर्रार दुनिया में, जहाँ हर एक रन की अहमियत होती है, एमएस धोनी (MS Dhoni) के एक निर्देश ने लीग के सबसे सफल गेंदबाज़ों में से एक, ड्वेन ब्रावो (Dwayne Bravo) के करियर की दिशा ही बदल दी थी। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के सबसे सफल गेंदबाज रहे ब्रावो ने हाल ही में उस ऐतिहासिक पल का खुलासा किया जिसने उन्हें हैरान कर दिया था।
यह वाकया 2018 का है, जब दो साल के प्रतिबंध के बाद चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल में वापसी की थी। एक मैच के दौरान, 34 वर्षीय ब्रावो ने बाउंड्री बचाने के लिए ‘लॉन्ग-ऑन’ पर एक ज़ोरदार डाइव लगाई। प्रशंसक ब्रावो की इस फुर्ती से खुश थे, लेकिन उनके कप्तान धोनी के मन में कुछ और ही चल रहा था।
“चार रन बचाने से ज़्यादा ज़रूरी हैं तुम्हारे चार ओवर”
एक पॉडकास्ट में बात करते हुए ब्रावो ने याद किया कि ओवर खत्म होने के बाद धोनी उनके पास आए और बड़ी शांति से एक ऐसी बात कही जिसने ब्रावो की सोच बदल दी। धोनी ने कहा:
“मेरी फील्ड पर आज के बाद कभी डाइव मत लगाना। तुम्हारे चार ओवर, उन चार रनों को बचाने से कहीं ज़्यादा कीमती हैं।”
ब्रावो बताते हैं कि धोनी का यह कहना उनके लिए किसी मास्टरक्लास से कम नहीं था। धोनी जानते थे कि उम्र के उस पड़ाव पर ब्रावो के लिए चोटिल होने का खतरा बढ़ गया था, और टीम को उनकी फील्डिंग से ज़्यादा उनकी डेथ-ओवर गेंदबाजी की ज़रूरत थी।
विश्वास की नींव: मैदान पर मिली आज़ादी
धोनी और ब्रावो का रिश्ता, जिसे ब्रावो “दूसरे माता-पिता से मिला भाई” (Brother from another mother) कहते हैं, आपसी भरोसे की एक मिसाल है। ब्रावो ने बताया कि उनके पहले ही मैच में जब उन्होंने धोनी की सलाह के बजाय अपनी पसंद की फील्डिंग लगाने पर ज़ोर दिया, तो धोनी ने उन पर भरोसा किया और दोबारा कभी उनके काम में दखल नहीं दिया।
ब्रावो का शानदार रिकॉर्ड
धोनी का ब्रावो के प्रति यह रक्षात्मक रवैया आंकड़ों में भी सही साबित होता है। ब्रावो आज भी सीएसके के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।
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कुल आईपीएल विकेट: 183
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सीएसके के लिए विकेट: 154
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पर्पल कैप: 2 बार (2013 और 2015)
नेतृत्व की अनूठी शैली
धोनी का यह व्यवहार उनके नेतृत्व कौशल (Man-management) का एक छोटा सा हिस्सा है। वे जानते हैं कि किस खिलाड़ी से कब और क्या काम लेना है। ब्रावो को घेरे (Inner circle) के अंदर फील्डिंग के लिए खड़ा करना और उनकी गेंदबाजी को सुरक्षित रखना इसी रणनीति का हिस्सा था।
आज ब्रावो भले ही एक कोच और मेंटर की भूमिका में हों, लेकिन धोनी द्वारा दी गई वह सलाह—कि अपनी ताकत को पहचानो और उसे टीम के लिए बचाकर रखो—उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक बनी हुई है।


