अमेरिका द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए सरकारी दस्तावेजों (FARA filings) से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मई 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में अभूतपूर्व कूटनीतिक दबाव बनाया था। इन दस्तावेजों के अनुसार, इस्लामाबाद ने भारत की सैन्य कार्रवाई को “किसी भी तरह रुकवाने” के लिए अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों के साथ 60 से अधिक बार संपर्क किया।
पहलगाम हमला और भारत का पलटवार
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 7 मई 2025 को शुरू हुए इस अभियान में भारतीय वायुसेना के राफेल और सुखोई विमानों ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और बहावलपुर जैसे इलाकों में आतंकी अड्डों को निशाना बनाया।
लॉबिंग का खेल: $5 मिलियन का दांव
पाकिस्तानी राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों ने वॉशिंगटन में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारी निवेश किया था। दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक पहुंच बनाने के लिए छह बड़ी लॉबिंग फर्मों के साथ लगभग $5 मिलियन (करीब 42 करोड़ रुपये) के वार्षिक अनुबंध किए थे।
इन संपर्कों का मुख्य उद्देश्य कश्मीर और क्षेत्रीय सुरक्षा के बहाने अमेरिका को इस संघर्ष में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर करना था। पाकिस्तान ने न केवल पेंटागन और स्टेट डिपार्टमेंट के अधिकारियों से मुलाकात की, बल्कि अमेरिकी पत्रकारों के माध्यम से अपनी “पीड़ित” छवि पेश करने की भी कोशिश की।
ट्रंप और ‘फील्ड मार्शल’ मुनीर की मुलाकात
पाकिस्तान की इस कूटनीतिक घेराबंदी का असर जून 2025 में दिखा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मेजबानी की। ट्रंप ने मुनीर को अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया और दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि उसने अपने सैन्य लक्ष्य प्राप्त करने के बाद ही हमला रोका था और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उस दौरान कहा था, “ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के संकल्प का एक प्रमाण है। हमारी प्रतिक्रिया केंद्रित और संतुलित थी, जिसका उद्देश्य केवल आतंक के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना था।”
बदली हुई रणनीति
सैटेलाइट तस्वीरों ने बाद में पुष्टि की कि पाकिस्तान के नूर खान और भोलारी जैसे प्रमुख एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचा था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल अपनी सीमाओं के भीतर रहकर रक्षा नहीं करेगा, बल्कि आतंक के उद्गम स्थल पर प्रहार करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है। पाकिस्तान की यह छटपटाहट और वॉशिंगटन में उसकी लॉबिंग, भारत की बढ़ती सैन्य श्रेष्ठता और कूटनीतिक अलगाव का ही परिणाम थी।


