Tuesday, February 17, 2026
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भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

अर्थ की महत्ता आदि काल से चली आ रही है। आचार्य चाणक्य ने भी कहा है कि राष्ट्र जीवन में समाज के सर्वांगीण उन्नति का विचार करते समय अर्थ आयाम का चिंतन अपरिहार्य बनता है। इस दृष्टि से जब हम इतिहास पर नजर डालते हैं तो पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का गौरवशाली इतिहास रहा है एवं जो भारतीय संस्कृति हजारों सालों से सम्पन्न रही है, उसका पालन करते हुए ही उस समय पर अर्थव्यवस्था चलाई जाती थी। भारत को उस समय सोने की चिड़िया कहा जाता था। वैश्विक व्यापार एवं निर्यात में भारत का वर्चस्व था। पिछले लगभग 5000 सालों के बीच में ज्यादातर समय भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है। उस समय भारत में कृषि क्षेत्र में उत्पादकता अपने चरम पर थी एवं कृषि उत्पाद विशेष रूप से मसाले आदि भारत से लगभग पूरे विश्व में पहुंचाए जाते थे। मौर्य शासन काल, चोला शासन काल, चालुक्य शासन काल, अहोम राजवंश, पल्लव शासन काल, पण्ड्या शासन काल, छेरा शासन काल, गुप्त शासन काल, हर्ष शासन काल, मराठा शासन काल आदि अन्य कई शासन कालों में भारत आर्थिक दृष्टि से बहुत ही सम्पन्न देश रहा है। धार्मिक नगर- प्रयागराज, बनारस, पुरी, नासिक आदि जो नदियों के आसपास बसे हुए थे, वे उस समय पर व्यापार एवं व्यवसाय की दृष्टि से बहुत सम्पन्न नगर थे। भारत में ब्रिटिश एंपायर के आने के बाद (ईस्ट इंडिया कम्पनी- 1764 से 1857 तक एवं उसके बाद ब्रिटिश राज- 1858 से 1947 तक) विदेशी व्यापार में भारत का पराभव का दौर शुरू हुआ एवं स्वतंत्रता प्राप्ति तक एवं कुछ हद तक इसके बाद भी यह दौर जारी रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक दृष्टि से भारत का दबदबा इसलिए था क्योंकि उस समय पर भारतीय संस्कृति का पालन करते हुए ही आर्थिक गतिविधियाँ चलाई जाती थीं। परंतु, जबसे भारतीय संस्कृति के पालन में कुछ भटकाव आया, तब से ही भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर से वर्चस्व कम होता चला गया। दूसरे, आक्रांताओं ने भी भारत, जिसे सोने की चिड़िया कहा जाता था, को बहुत ही दरिंदगी से लूटा था। इस सबका असर यह हुआ कि ब्रिटिश राज के बाद तो भारत कृषि उत्पादन में भी अपनी आत्मनिर्भरता खो बैठा। आज भी देश में 60 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामों में निवास करती है और अपने रोजगार के लिए मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र पर ही निर्भर है। भारत अभी भी कृषि प्रधान देश ही कहा जाता है परंतु फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का हिस्सा लगभग मात्र 16-18 प्रतिशत ही है। कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार, भारत में लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या 12.563 करोड़ है।

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