Tuesday, January 20, 2026
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छात्र धार्मिक कार्यो को करने में जुटे : त्रिवेंद्र सिंह रावत

हरिद्वार, । पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कनखल स्थित चेतनानंद गिरि आश्रम पहुंचकर ब्रह्मलीन महंत स्वामी विष्णुदेवानंद गिरि महाराज की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वामी विष्णुदेवानंद गिरि महाराज को पुण्यात्मा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन काल में सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्य किए। उन्होंने हिंदु धर्म का प्रचार प्रसार किया और सभी सनातनियों को एक सूत्र में पिरोने का अभूतपूर्व कार्य किया। उनकी शिक्षा ग्रहण करने वाले तमाम छात्र धार्मिक कार्यो को करने में जुटे है। उनकी शिक्षा को आत्मसात कर जीवन में चरितार्थ करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। चेतनानंद गिरि आश्रम के परमाध्यक्ष श्रीमहंत स्वामी विष्णुदेवानंद गिरि महाराज के तृतीय निर्वाण महोत्सव पर विशाल संत समागम व श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता महामण्डलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज व संचालन स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज ने किया। श्रद्धांजलि सभा को अध्यक्ष पद से सम्बोधित करते हुए स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहाकि ब्रह्मलीन स्वामी विष्णुदेवानंद गिरि महाराज तप व त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनके तप बल का ही परिणाम है कि आज उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेकानेक शिष्य बड़े-बड़े पदों पर सुशोभित हैं। वे विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उन्होंने अपना जीवन शिक्षा दान व भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में ही समर्पित कर दिया। महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। ऐसे ही निर्मल जल के समान स्वामी विष्णुदेवानंद गिरि महाराज थे। उन्होंने कहा कि यह उनके तप का ही प्रताप है कि उनके ्िशष्य महंत स्वामी रामानंद गिरि महाराज व स्वामी कृष्णानंद गिरि महाराज आश्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करते हुए निरंतर वृद्धि कर समाज कल्याण में समर्पण भाव से जुड़े हुए हैं। श्रद्धांजलि सभा में आए सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए महंत स्वामी रामानंद गिरि महाराज व स्वामी कृष्णानंद गिरि महाराज ने कहा कि सेवा का मार्ग उनके पूज्य गुरुदेव ने दिखाया था। उसका वह पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि संतों की सेवा करते हुए धर्म और संस्कृति का प्रचार प्रसार करना ही उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य होगा। इससे पूर्व प्रातः रूद्राभिषेक व गुरु मूर्तियों को पूजन किया गया। साथ ही सप्ताह भर से चल रही श्रीमद् भागवत कथा की पूर्णाहुति की गई। इस अवसर पर आश्रम के परमाध्यक्ष महंत स्वामी रामानंद गिरि महाराज व स्वामी कृष्णानंद गिरि महाराज ने त्रिवेन्द्र सिंह रावत का शॉल ओढ़ाकर व माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी ईश्वरानंद गिरि महाराज, म.म.स्वामी रामेश्वरांनद सरस्वती, म.म.स्वामी गिरधर गिरि, म.म.स्वामी आनन्द चेतन, म.म.स्वामी शिवप्रेमानंद, स्वामी अनंतानंद, श्रीपंचायती अखाड़े के पंच परमेश्वर, सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज, आचार्य हरिहरानंद, महंत योगेन्द्रानंद शास्त्री समेत दिल्ली, हरियाणा व कई प्रांतों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।

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